Posts

प्राकृतिक आपदाओं से कबीर साहेब ही बचा सकते हैं

Image
जब जब इस पृथ्वी पर पाप बढ़ जाता है और हर घट जाता है उस समय प्राकृतिक आपदाएं आना शुरू हो जाती है जैसे  सूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकम्प, भूस्खलन, वनों में लगनेवाली आग, ओलावृष्टि, टिड्डी दल और ज्वालामुखी फटने जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, न ही इन्हें रोका जा सकता है, लेकिन इनके प्रभाव को एक सीमा तक जरूर कम किया जा सकता है, जिससे कि जान-माल का कम से कम नुकसान हो। यह कार्य तभी किया जा सकता है, जब सक्षम रूप से आपदा प्रबंधन का सहयोग मिले। प्रत्येक वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से अनेक लोगों की मृत्यु हो जाती है, इससे सर्वाधिक जाने चली जाती है। आपदाओं से बचने के लिए मानव को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की भक्ति करनी चाहिए क्योंकि इतिहास में ऐसे बहुत सारे प्रमाण है कि कबीर जी के अनुयायियों पर  जब-जब प्राकृतिक आपदा आई है उस समय कबीर जी ने अपनी शक्ति से उस प्राकृतिक आपदा को समाप्त कर दिया दामोदर सेठ का जहाज डूबने से बचाया था संत कबीर जी ने

सतगुरु की पहचान

Image
 दुनिया में इस समय संत महात्माओं की बाढ़ सी आई हुई है लेकिन लेकिन भगत समाज यह कैसे निर्णय करें कौन सा भी सच्चा है ?   आदरणीय गरीबदास जी महाराज ने अपने ग्रंथ साहिब में पूरे ग्रुप की पहचान बताई है कि जो सतगुरु होगा वह चार वेद छह शास्त्र 18 पुराण के अनुसार भक्ति चयन करेगा और भगत समाज को भक्ति करने को प्रेरित करेगा वही सतगुरु होगा संत कबीर साहिब जी में सतगुरु की पहचान बताते हुए आदरणीय धर्मदास जी  से कहा था कि जो पूरा गुरु होगा उसके साथ में वर्तमान के सभी संत  लड़ाई झगड़ा  करेंगे क्योंकि वह सत्य गरू  शास्त्रों के आधार पर ज्ञान बताएगा और वर्तमान के सभी संतों की दुकानें बंद हो जाएंगी  पवित्र वेदों में लिखा है कि जो सच्चा गुरु होगा वह अन्य संत महंतों की तरह मांगता  नहीं फिरता

पूर्ण परमात्मा तीसरे मुक्तिधाम में रहता है

Image
पूर्ण परमात्मा ।। पूर्ण परमात्मने नमः ।। कबीर साहेब जी अपने परम शिष्य धर्मदास जी को कह रहे हैं कि ध्यान पूर्वक सुन वह पूर्ण ब्रह्म (परम अक्षर पुरुष) परमात्मा मैंने (कबीर साहेब ने) पाया उस परमात्मा (पूर्णब्रह्म) का सर्व ब्रह्मण्डों से पार स्थान है वहां पर वह आदि परमात्मा (सतपुरुष) रहता है। वही सर्व जीवों का दाता है:   ताहि न यह जग जाने भाई। तीन देव में ध्यान लगाई।। तीन देव की करहीं भक्ति। जिनकी कभी न होवे मुक्ति।। तीन देव का अजब खयाला। देवी-देव प्रपंची काला।। इनमें मत भटको अज्ञानी। काल झपट पकड़ेगा प्राणी।। तीन देव पुरुष गम्य न पाई। जग के जीव सब फिरे भुलाई।। जो कोई सतनाम गहे भाई। जा कहैं देख डरे जमराई।। ऐसा सबसे कहीयो भाई। जग जीवों का भरम नशाई।। कह कबीर हम सत कर भाखा ,  हम हैं मूल शेष डार ,  तना रू शाखा।। साखी:   रूप  देख  भरमो  नहीं ,  कहैं कबीर विचार।            अलख पुरुष हृदये लखे ,  सोई उतरि है पार।। उस परमात्मा    को कोई नहीं जानता तथा उसकी प्राप्ति की विधि भी किसी शास्त्र में...

संत गरीब दास जी महाराज की वाणी

Image
गरीब ,   पतिब्रता चूके नहीं, धर अंबर धसकंत। संत न छांड़े संतता, कोटिक मिलैं असंत।। भावार्थ चाहे धर धरती तथा अम्बर आकाश धसके यानि नष्ट हो जाऐं इतनी आपत्ति में भी दृढ़ भक्त पतिव्रता आत्मा डगमग नहीं होता। इसी प्रकार संत सत्य भाव से भगवान पर समर्पित साधक अपनी सन्तता साधु वाला स्वभाव नहीं छोड़ता चाहे उसको करोड़ों असन्त नास्तिक व्यक्ति या अन्य देवों के उपासक मिलो और वे कहें कि आप गलत ईष्ट की पूजा कर रहे हो या कहें कि क्या रखा है भक्ति में ? आदि-आदि विचार अभक्तो असन्तों के सुनकर भक्त अपनी साधुता नहीं छोड़ता।

पूर्ण संत की क्या पहचान है

Image
कलियुग में भक्त समाज के सामने पूर्ण गुरु की पहचान करना सबसे जटिल प्रश्न बना हुआ है। लेकिन इसका बहुत ही लघु और साधारण–सा उत्तर है कि जो गुरु शास्त्रो के अनुसार भक्ति करता है और अपने अनुयाईयों अर्थात शिष्यों द्वारा करवाता है वही पूर्ण संत है। चूंकि भक्ति मार्ग का संविधान धार्मिक शास्त्र जैसे – कबीर साहेब की वाणी, नानक साहेब की वाणी, संत गरीबदास जी महाराज की वाणी, संत धर्मदास जी साहेब की वाणी, वेद, गीता, पुराण, कुरआन, पवित्र बाईबल आदि हैं।

बिछड़े दोस्तों की याद में एक छोटी सी कहानी

Image
जीवन में रिश्तों की अहमियत बहुत होती है जन्म के बाद सभी रिश्ते जबरदस्ती हम पर थोप दिए जाते हैं बस एक ही रिश्ता होता है जिसे हम खुद अपनी मर्जी से बनाते हैं वो रिश्ता है दोस्ती का यह ऐसा रिश्ता होता है जो हर रिश्ते की कमी को पूरा करने का दम रखता है लेकिन एक दोस्त से बिछड़ जाने के बाद जब उसकी यादें लौट कर आती है तो कोई भी रिश्ता उसकी कमी को पूरा नहीं कर सकता उन्हीं दोस्तों की याद में यह छोटी सी कहानी लिखी है वक़्त की यारी तो हर कोई करता है मेरे दोस्त मजा तो तब आये जब वक़्त बदल जाये और यार ना बदले मनीष कुमार महावर हिण्हौन सिटी 

संत कबीर साहिब जी की वाणी

Image
बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि, हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि। अर्थ : यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है। इसलिए वह ह्रदय के तराजू में तोलकर ही उसे मुंह से बाहर आने देता है.