पूर्ण परमात्मा ।। पूर्ण परमात्मने नमः ।। कबीर साहेब जी अपने परम शिष्य धर्मदास जी को कह रहे हैं कि ध्यान पूर्वक सुन वह पूर्ण ब्रह्म (परम अक्षर पुरुष) परमात्मा मैंने (कबीर साहेब ने) पाया उस परमात्मा (पूर्णब्रह्म) का सर्व ब्रह्मण्डों से पार स्थान है वहां पर वह आदि परमात्मा (सतपुरुष) रहता है। वही सर्व जीवों का दाता है: ताहि न यह जग जाने भाई। तीन देव में ध्यान लगाई।। तीन देव की करहीं भक्ति। जिनकी कभी न होवे मुक्ति।। तीन देव का अजब खयाला। देवी-देव प्रपंची काला।। इनमें मत भटको अज्ञानी। काल झपट पकड़ेगा प्राणी।। तीन देव पुरुष गम्य न पाई। जग के जीव सब फिरे भुलाई।। जो कोई सतनाम गहे भाई। जा कहैं देख डरे जमराई।। ऐसा सबसे कहीयो भाई। जग जीवों का भरम नशाई।। कह कबीर हम सत कर भाखा , हम हैं मूल शेष डार , तना रू शाखा।। साखी: रूप देख भरमो नहीं , कहैं कबीर विचार। अलख पुरुष हृदये लखे , सोई उतरि है पार।। उस परमात्मा को कोई नहीं जानता तथा उसकी प्राप्ति की विधि भी किसी शास्त्र में...
जब जब इस पृथ्वी पर पाप बढ़ जाता है और हर घट जाता है उस समय प्राकृतिक आपदाएं आना शुरू हो जाती है जैसे सूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकम्प, भूस्खलन, वनों में लगनेवाली आग, ओलावृष्टि, टिड्डी दल और ज्वालामुखी फटने जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, न ही इन्हें रोका जा सकता है, लेकिन इनके प्रभाव को एक सीमा तक जरूर कम किया जा सकता है, जिससे कि जान-माल का कम से कम नुकसान हो। यह कार्य तभी किया जा सकता है, जब सक्षम रूप से आपदा प्रबंधन का सहयोग मिले। प्रत्येक वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से अनेक लोगों की मृत्यु हो जाती है, इससे सर्वाधिक जाने चली जाती है। आपदाओं से बचने के लिए मानव को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की भक्ति करनी चाहिए क्योंकि इतिहास में ऐसे बहुत सारे प्रमाण है कि कबीर जी के अनुयायियों पर जब-जब प्राकृतिक आपदा आई है उस समय कबीर जी ने अपनी शक्ति से उस प्राकृतिक आपदा को समाप्त कर दिया दामोदर सेठ का जहाज डूबने से बचाया था संत कबीर जी ने