बिछड़े दोस्तों की याद में एक छोटी सी कहानी


जीवन में रिश्तों की अहमियत बहुत होती है जन्म के बाद सभी रिश्ते जबरदस्ती हम पर थोप दिए जाते हैं बस एक ही रिश्ता होता है जिसे हम खुद अपनी मर्जी से बनाते हैं वो रिश्ता है दोस्ती का यह ऐसा रिश्ता होता है जो हर रिश्ते की कमी को पूरा करने का दम रखता है लेकिन एक दोस्त से बिछड़ जाने के बाद जब उसकी यादें लौट कर आती है तो कोई भी रिश्ता उसकी कमी को पूरा नहीं कर सकता उन्हीं दोस्तों की याद में यह छोटी सी कहानी लिखी है

वक़्त की यारी तो हर कोई करता है मेरे दोस्त
मजा तो तब आये जब वक़्त बदल जाये और यार ना बदले
मनीष कुमार महावर हिण्हौन सिटी 

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