जब जब इस पृथ्वी पर पाप बढ़ जाता है और हर घट जाता है उस समय प्राकृतिक आपदाएं आना शुरू हो जाती है जैसे सूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकम्प, भूस्खलन, वनों में लगनेवाली आग, ओलावृष्टि, टिड्डी दल और ज्वालामुखी फटने जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, न ही इन्हें रोका जा सकता है, लेकिन इनके प्रभाव को एक सीमा तक जरूर कम किया जा सकता है, जिससे कि जान-माल का कम से कम नुकसान हो। यह कार्य तभी किया जा सकता है, जब सक्षम रूप से आपदा प्रबंधन का सहयोग मिले। प्रत्येक वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से अनेक लोगों की मृत्यु हो जाती है, इससे सर्वाधिक जाने चली जाती है। आपदाओं से बचने के लिए मानव को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की भक्ति करनी चाहिए क्योंकि इतिहास में ऐसे बहुत सारे प्रमाण है कि कबीर जी के अनुयायियों पर जब-जब प्राकृतिक आपदा आई है उस समय कबीर जी ने अपनी शक्ति से उस प्राकृतिक आपदा को समाप्त कर दिया दामोदर सेठ का जहाज डूबने से बचाया था संत कबीर जी ने